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पीएमसीएच में मरीजों पर डॉक्टरों की कथित हिंसा, संजय सिंह ने तुरंत कार्रवाई के दिए निर्देश

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पटना। बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल (पीएमसीएच) में मरीजों और उनके परिजनों के साथ कथित हिंसक और अनुचित व्यवहार का मामला सामने आया है। आरोप हैं कि अस्पताल में इलाज के लिए आए मरीजों और उनके परिजनों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया, उनके मोबाइल फोन छीन लिए गए और कई डॉक्टर नशे में थे। इस गंभीर घटना के बाद पटना के पीरबहोर थाने में 35 जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दी गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए लोजपा (रामविलास) के स्वास्थ्य मंत्री संजय सिंह ने तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने और पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने के निर्देश पटना पुलिस को दिए। मंत्री ने स्पष्ट किया कि पीड़ितों को न्याय दिलाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
पीड़ितों के बयान के अनुसार, मधुबनी के रहने वाले राहुल मिश्रा और उनके भाई सोनू 2 मार्च को ट्रेन यात्रा के दौरान घायल हुए थे। उन्हें बेहतर इलाज के लिए पीएमसीएच रेफर किया गया था। 3 मार्च को जब वे सर्जरी विभाग में पहुंचे, तो डॉक्टरों ने उन्हें बाहर से सीटी स्कैन कराने को कहा। जब राहुल ने लिखित रूप में जाँच अस्पताल में कराने की मांग की, तो डॉक्टरों ने गाली-गलौज के साथ मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि भागने के दौरान जूनियर डॉक्टर और सुरक्षा गार्ड उन्हें मरीन ड्राइव की ओर घेरकर पीटते रहे।
पीड़ितों ने आरोप लगाया कि मारपीट के समय कई डॉक्टर नशे में थे। इसके अलावा उनका मोबाइल फोन भी छीन लिया गया। घावों का तत्काल इलाज नहीं किया गया और इंजुरी रिपोर्ट देने से भी इंकार किया गया। यह घटना उस समय सामने आई है जब पीएमसीएच में पहले भी चर्चित यूट्यूबर मनीष कश्यप पर जानलेवा हमला हो चुका था, जिसके कारण उन्हें कई दिनों तक भर्ती रहना पड़ा था।
मंत्री संजय सिंह ने कहा, “यह अस्पताल मरीजों का इलाज करने के लिए है, आतंक फैलाने के लिए नहीं। अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके परिजनों के साथ हिंसा बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सीसीटीवी फुटेज की मदद से सभी आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह विफल रही। मरीजों और परिजनों को किसी भी तरह की सुरक्षा या सुविधा नहीं मिली। गंभीर चोटों और मानसिक दबाव के बावजूद उन्हें तत्काल इलाज नहीं मिला, जिससे उनका स्वास्थ्य और बिगड़ गया। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की विश्वसनीयता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस मामले में प्रशासन की भूमिका भी सामने आई है। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया। शाहजहांपुर, पीरबहोर और पीएमसीएच प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी। इस दौरान मंत्री संजय सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीसीटीवी फुटेज, गवाहों और अस्पताल के कर्मचारियों से विस्तृत जानकारी लेकर सभी आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाए।
घायलों ने बताया कि मारपीट के समय उन्हें जान का खतरा महसूस हुआ। डॉक्टरों और सुरक्षा गार्डों ने इतनी बेरहमी दिखाई कि मरीज और परिजन दोनों सहमति और डर के बीच अस्पताल से भागने को मजबूर हुए। इस पूरे घटनाक्रम में पीएमसीएच के भीतर सुरक्षा, निगरानी और आपातकालीन प्रतिक्रिया की कमी स्पष्ट रूप से दिखी।
मंत्री संजय सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को कहा कि दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा और अस्पताल में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भविष्य में कड़े कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द उचित इलाज और न्याय मिलना चाहिए।
पीड़ितों ने मीडिया से कहा कि यह घटना सिर्फ एक isolated घटना नहीं है, बल्कि अस्पताल में प्रणालीगत लापरवाही और सुरक्षा की कमी का उदाहरण है। उन्होंने मांग की कि अस्पताल में आने वाले हर मरीज और उनके परिजन को समान और सुरक्षित सेवा मिलनी चाहिए।

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